स्तम्भन शक्ति
शत्रुओं की गति रोकती हैं और नकारात्मक शक्तियों को निष्क्रिय करती हैं।
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स्थिरता, स्तम्भन, संरक्षण और लक्ष्य-शक्ति का दिव्य केन्द्र। दस महाविद्याओं की आठवीं देवी।
कार्यालय में स्थापना
Siddha · Abhimantrit
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यह आपके लिए है या नहीं, यह पहले समझिए। कीमत बाद में। पूरा समय दीजिए।
जब रात को नींद नहीं आती… जब दिन भर मन में एक अजीब सा डर घूमता रहता है… जब आप देख लेते हैं कि सामने वाला आपके ख़िलाफ़ बोल रहा है, पर आप कुछ कर नहीं पाते।
तब समस्या सिर्फ़ क़ानूनी या व्यावसायिक नहीं रहती। समस्या यह है कि आपकी वाणी, आपकी शक्ति और आपकी जगह कोई और हथिया रहा है।
यह चमत्कार का वादा नहीं है। यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने बहुत सह लिया है।
दस महाविद्याओं में आठवीं देवी। स्तम्भन शक्ति की अधिष्ठात्री। स्तम्भन का अर्थ है स्थिर करना, रोकना या निष्क्रिय करना। पीत वर्ण, गदा और जीभ पकड़ने की मुद्रा उनकी अद्वितीय शक्ति का प्रतीक है। वे बाहरी शत्रुओं के साथ भक्त के मानसिक भ्रम, भय और आंतरिक संघर्ष को भी समाप्त करती हैं।
शत्रुओं की गति रोकती हैं और नकारात्मक शक्तियों को निष्क्रिय करती हैं।
कटु वाणी, झूठे आरोप, चुगली और वाचिक आक्रमण से रक्षा।
चारों ओर अदृश्य सुरक्षा कवच बनाकर साधक की रक्षा।
भ्रम, भय, दबाव और अस्थिरता को दूर कर मन को स्थिर करती हैं।
एकाग्रता बढ़ाकर साधक को लक्ष्य तक पहुँचने की शक्ति देती हैं।
शत्रुता, बाधा, विरोध और दुष्ट प्रभावों को नियंत्रित कर विजय दिलाती हैं।
मंत्र, बीज, चक्र, संख्यात्मक कूट, दिशा-संतुलन और देवी-तत्त्व का जीवंत संयोजन। ऊपर दिव्य दृष्टि, मध्य में बीज, चारों ओर स्तम्भनात्मक ज्यामिति, बाएँ-दाएँ अंक, सीमा-रेखाओं में सुरक्षा-क्षेत्र। एक ही भाव: हानिकारक ऊर्जा को रोककर साधक की शक्ति को केन्द्रित करना।
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सिद्ध होकर, अभिमंत्रित होकर ही मिलेगा।
पहले माँ का परिचय सुनिए। फिर यंत्र को जीवित रूप में देखिए। दोनों फ़ाइलें पेज पर ही चलेंगी, कुछ इंस्टॉल नहीं करना।
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बगलामुखी महायंत्रम का श्रवण-परिचय। ईयरफ़ोन लगाकर एक बार पूरा सुनें।
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आपका 8 सेकंड का यंत्र-दर्शन। प्ले दबाकर देखें।
ब्रह्मांड के 36 तत्त्व और 16 लाख बीज मंत्र का मिलन। देखने मात्र से गंभीर, नियंत्रक ऊर्जा का अनुभव।
मध्य के ऊपर बनी आँखें सजावट नहीं। माँ की जागृत दृष्टि, निग्रह शक्ति और सर्वदिशात्मक जागरूकता।
मध्य में माँ बगलामुखी का मूल बीज। यही महायंत्र की धड़कन है। शक्ति का केन्द्रण, विरोधी ऊर्जा का निष्प्रभावी होना।
बाएँ-दाएँ अंक साधारण गिनती नहीं। समय, काल, दिशा, ग्रह और नक्षत्र की ज्यामिति। रीढ़ की 36 ग्रंथियाँ।
36 संयोजनों के भीतर 16 लाख बीज मंत्र स्पंदित। शत्रु के वचन को स्तब्ध, बुद्धि को भ्रमित करने का भाव।
बायाँ: ग्रहण, धारण, गूढ़ शक्ति। दायाँ: सक्रियता, प्रक्षेपण, कार्यान्वयन।
पार्श्व में नियंत्रक आयुध-तत्व। नीचे भटकी ऊर्जाओं को परिधि में लाकर नियंत्रित करने का संकेत।
विरोध, बाधा, वाचिक आक्रमण, निर्णयगत भ्रम या शत्रुता झेल रहे साधकों के लिए परंपरागत उपयोग।
जो लोग, परिस्थितियाँ या अदृश्य प्रभाव प्रगति रोक रहे हों, उनके लिए स्तम्भन और नियंत्रण का माध्यम।
चुगली, अपमान, झूठे आरोप, कटुता और विषैली बातों के प्रभाव को थामने वाला पक्ष।
भय, संशय और दबाव में बिखरी ऊर्जा को समेटकर एकाग्रता और धैर्य की ओर ले जाना।
काम बनते-बनते रुक जाएँ, योजनाएँ अटक जाएँ, परिणाम दिशा बदलें, तब ऊर्जा-केन्द्रण।
साधक के चारों ओर भाव-ऊर्जा जिसमें व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित, संयमित और नियंत्रित अनुभव करता है।
डरने की जगह डटकर खड़े होने की क्षमता। परिस्थितियों से भागना नहीं, उन्हें साधना।
बिखराव और असंतुलन से हाथ से निकलते लक्ष्य को समेटकर दिशा देना।
परिवार के साथ स्थायी स्थापना। सिद्ध अवस्था में आता है, जटिल साधना अनिवार्य नहीं।
झूठी शिकायत, साज़िश, सहकर्मी की जुबान। वाणी और निर्णय पर नियंत्रण लौटाने के लिए।
प्रतिस्पर्धी की ग़लतफ़हमी, रुके ऑर्डर, क्लाइंट का मुँह फेरना।
मुकदमे, गवाह, दस्तावेज़ और दबाव जब बार-बार बदल रहे हों।
रात की आहट, अशांत नींद, घर का भारीपन।
यात्रा और स्थानान्तरण के समय सुरक्षा-कवच का भाव।
मंदिर प्रांगण से घर की वेदी तक। वही प्लेट, वही लकड़ी का बॉक्स, वही प्रमाण।
पढ़ते समय अगर लगे “यह तो मेरी कहानी है”, माँ आपको बुला रही हैं।
प्रवीणभाई ठक्कर
नीताबेन जोशी
रमेशभाई पटेल
कविता देवी राठौड़
दीपकसिंह चौहान
सिद्धिकरण
दक्षिणांशीय पूजन, तांत्रिक अभिमंत्रण और सामूहिक हवन। जब तक धातु की आवृत्ति देवी-तत्त्व से मेल न खाए। इसीलिए यह ख़रीद नहीं, प्राप्ति है।
विश्वास के हर प्रश्न का स्पष्ट उत्तर।
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